सत्तू का Business कैसे करें – सत्तू के फायदे और नुकसान की पूरी जानकारी

क्या आप सत्तू का Business करना चाहते हैं या आपके स्वस्थ के लिए सत्तू का प्रतिदिन सेवन करने से क्या फायदे एवं नुकसान होते हैं की विस्तार में जानकारी लेना चाहते हैं. क्या आप एक मात्र सत्तू से बनने वाली चप्पन भोग के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप सही जगह पर है.

इस आर्टिकल में हमने विस्तार में सभी बातों को ध्यान रखते हुए बताने की कोशिश की Sattu Ka Business Kaise Kare और Sattu Ke Fayde Aur Nuksan.

इस Article के मदद से आप जानेंगे Sattu के Business के लिए Registration कहाँ से करे साथ ही रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कौन से Documents जरुरी हैं, Sattu बनाने के लिए मशीन कौन सी Market में उपलब्ध है, सत्तू से कितने प्रकार के भोग बन सकते हैं, सत्तू का प्रतिदिन सेवन आपके लिए कैसा है एवं कहां से खरीदें की पूरी जानकारी विस्तार में जानेंगे.

Sattu Ka Business Kaise Kare - Sattu Ke Fayde Aur Nuksan
Sattu Ka Business Kaise Kare – Sattu Ke Fayde Aur Nuksan

तो चलिए शुरू करते हैं Sattu Ka Business Kaise Kare आर्टिकल पढ़ने से…

प्राचीन करके बात करें तो सबसे पहले सत्तू मौर्य साम्राज्य की सेनाओं द्वारा (322 और 185 ईसा पूर्व के बीच) इस्तेमाल किया गया था, और इतना ही नहीं सत्तू का इस्तेमाल 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान बहादुर भारतीय सैनिकों के सुपर Food के रूप में भी माना जाता है.

सत्तू का उपयोग उतना ही पुराना है जितना कि जौ की खेती, जो कम से कम 5000 ईसा पूर्व पुरानी है. यह सैन्य पुरुषों, यात्रियों और भिक्षुओं के लिए पारंपरिक प्रधान रहा है, जो हमेशा से घरों और मठों से दूर महीनों तक आराम से स्वस्थ एवं जीवित रहते थे.

भारत के कई सारे अलग-अलग राज्यों में होने वाले खेती के अनुसार सत्तू को उनसे मिला कर उसे और पौष्टिक आहार की तरह इस्तेमाल किया जाने लगा जैसे कि: भुने हुए जौ (जौ) या बंगाल चना (चना) को पीसकर और दोनों को मिलाकर भी सत्तू का उपयोग बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पंजाब की रसोई में लंबे समय से किया जाता रहा है.

इसे नाश्ते के रूप में चीनी और घी के साथ, ठंडा पेय बनाने के लिए पानी में मिलाकर या गेहूं के गोले में भरकर प्रसिद्ध बिहारी लिट्टी बनाने के लिए भुना जा सकता है.

हालांकि सत्तू की रेसिपी अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती है, राज मार्केट में कई सारी कंपनियों ने इस पारंपरिक भोजन के स्वास्थ्य लाभों को देखते हुए एक पाउच बनाए और उनकी बिक्री शुरू कर कर दी, जिसे पलक झपकते चुटकियों में पीने योग्य बदला जा सकता है.

Sattu Ka Business Kaise Kare

सत्तू का बिजनेस शुरू करने से पहले आपको जानना होगा कि सत्तू को जौ से कैसे निकाल कर Process किया जाता है, उसकी साफ सफाई कैसे की जाती है फिर उसके बाद ही आप सत्तू का बिजनेस अच्छे से चला पाएंगे अन्यथा आपके सत्तू में किसी भी तरह का कंकण आने पर यह के बिजनेस के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है.

तो चलिए शुरू करते हैं यह जानने से कि सत्तू को Process कैसे करते हैं….

सत्तू, चने को प्रोसेस करके बनाया जाता है. चना आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दाल है और इससे दाल या करी बनाई जाती है जो अधिकांश भारतीय घरों में बहुत लोकप्रिय वस्तु है.

इसका छिलका उतार कर साफ किया जाता है, भुना जाता है और चूर्ण किया जाता है उन्हें पाउडर या आटे के रूप में परिवर्तित करने के लिए और इसे सत्तू के रूप में जाना जाता है.

इसका उपयोग कई शाकाहारी भोजन में किया जाता है और नाश्ते की तरह इस्तेमाल किया जाता है. भोजपुर या हजारीबाग जिले एक आदर्श स्थान हो सकते हैं क्योंकि यहाँ कई सारे दाल मिले होते हैं.

कथित तौर पर, बहुत कम सत्तू बनाने वाले पौधे हैं यह बिहार की बहुत लोकप्रिय वस्तु है और जाहिर है बिहार एवं झारखंड इसका एक पसंदीदा स्थान है. सत्तू का उपयोग कई घरों और Restaurant में नियमित रूप से किया जाता है.

भोजनालय इसका उपयोग विशेष रूप से गर्मियों के दौरान कई भोजन और नाश्ते की तैयारी में किया जाता है और यह खपत द्रव्यमान की एक वस्तु है. चूंकि यह चने से बनाया जाता है, इसलिए इसमें कई पोषण मूल्य भी होते है.

चने की दाल को पल्स – क्लीनिंग मशीन की मदद से साफ किया जाता है और फिर बिजली से चलने वाले रोस्टर में भुना जाता है. इसके बाद महीन जाली का आकार प्राप्त करने के लिए है.

अंत में, किसी भी असामान्य सामग्री या मोटे पाउडर को निकालने के लिए इसे छलनी से गुजारा जाता है और फिर पैक किया जाता है. इस प्रक्रिया की हानि 4.5% तक की लगभग होती है. मांग और आपूर्ति में चना भारतीयों के आहार का एक अभिन्न अंग है और करी या दाल बनाने में उपयोग के अलावा, इसके पाउडर का उपयोग कई शाकाहारी तैयारियों को तैयार करने में किया जाता है.

इसका उपयोग रोटियां और एक लोकप्रिय स्नैक आइटम जिसे “लिट्टी” के रूप में जाना जाता है, बनाने में किया जाता है. इस उत्पाद का बाजार शहरी, अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करते हुए बिखरा हुआ है.

सत्तू का बिजनेस अगर आप छोटे तपते पर करना चाहते हैं तो आपको होलसेल में बस चना खरीदना होगा और आप इसे आपके घर में ही साफ करके एवं मिक्सर में पीसकर किलो के हिसाब से दुकान पर बेच सकते हैं.

इसके अलावा अगर आप सत्तू का बिजनेस बड़े तपते पर करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले एक जगह ढूंढ नहीं होगी जहां पर आपको सत्तू पीसने की मशीन बैठा नहीं होगी. ध्यान रखें यह जगह ज्यादा बाहर के एरिया में ना हो और ना ही ज्यादा बंद जगह पर हो.

इसके बाद आपको चने की साफ सफाई के लिए और एवं उसके छिलका उतारने के लिए या तो आप हाथ से काम करने वाले मजदूरों को रखकर काम करवा सकते हैं या फिर आप इसके लिए भी एक मशीन बैठा सकते हैं जिससे वह इंसानों के मुकाबले कई गुना ज्यादा आपके चने से छिलके निकालकर उसे साफ करने में मदद कर सकती है.

सत्तू का बिजनेस करने के लिए आपको कोई नहीं दुकान की जरूरत नहीं पड़ती है आप आसानी से शहर एवं गांवों में उपलब्ध किसी भी किराना स्टोर से बात करके उन्हें होलसेल में भेज सकते हैं और आप आपकी Extra कमाई के लिए इन्हें खुले में भी लोगों को बेच सकते हैं.

सत्तू से होने वाले फायदे:

  • सत्तू को पोषण का पावरहाउस भी कहा जाता है.
  • यह एक सुपरफूड के रूप में उभर रहा है और सबसे अच्छी बात यह है कि यह बेहद किफायती और पचाने में भी आसान है.
  • सत्तू अपने प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और सूक्ष्म पोषक तत्वों के कारण, यह एक पौष्टिक भोजन के रूप में कार्य कर सकता है. इसका उपयोग प्रोटीन शेक बनाने के साथ-साथ मांसपेशियों को हासिल करने के लिए भी किया जा सकता है.
  • सत्तू का शरबत पीने से आप गर्मी से छुटकारा पा सकते हैं और यह आपको ऊर्जा भी प्रदान करता है.
  • यह बेहद स्वादिष्ट होता है और प्रोटीन की आपूर्ति प्रदान करने में सक्षम है.
  • यह पेट फूलना, कब्ज और एसिडिटी, सूजन और अपच जैसी पाचन संबंधी समस्याओं से लड़ने में मदद करता है.
  • सत्तू कैल्शियम और कई अन्य खनिजों और आयरन जैसे विटामिन से भरपूर होता है, जो रक्त परिसंचरण में मदद करता है और सूजन को कम करता है.
  • यह बालों को भी मजबूत करता है और त्वचा की गुणवत्ता में भी सुधार करता है.
  • सत्तू लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला पेय है और मधुमेह के रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है.

सत्तू का सेवन करने से होने वाले नुकसान:

जैसा की हम जानते है हर अच्छी चीजों का एक बुरा पक्ष भी होता है. अधिक मात्रा में सेवन करने पर सत्तू के साइड इफेक्ट्स में गैस और सूजन शामिल हैं.

जिन लोगों को गैस की समस्या होती है उन्हें सत्तू का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए. कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जिन लोगों को गॉलब्लैडर और किडनी स्टोन है उन्हें बंगाल चना सत्तू से बचना चाहिए.

Sattu Ka Atta Means

सत्तू एक प्रकार का देशज व्यंजन है, जो भूने हुए जौ, मक्का और चने को पीस कर बनाया जाता है. बिहार में यह काफी लोकप्रिय है और कई रूपों में प्रयुक्त होता है.

सामान्यतः यह चूर्ण के रूप में रहता है जिसे पानी में घोल कर या अन्य रूपों में खाया अथवा पिया जाता है. सत्तू के सूखे (चूर्ण) तथा घोल दोनों ही रूपों को ‘सत्तू’ कहते हैं.

Sattu Ka Atta Price

सत्तू के आटे का प्राइस अब नीचे दिए हुए बटन की मदद से जान सकते हैं एवं वहां से आप ऑनलाइन खरीद भी सकते हैं.

Sattu Ka Ghol Kaise Banate Hain

गर्मी के मौसम में पानी में चने का सत्तू और थोड़ा सा नमक तथा भुना हुआ जीरा मिलाकर पीने से शरीर को ठंडक प्राप्त होती है, इसलिए लू लगने का डर नहीं रहता है. चना कफनाशक है. यही कारण है कि रात को सोते समय एक पाव दूध में दो बड़ा चम्मच चने का सत्तू मिलाकर पीने से श्वास नली में जमा कफ सुबह निकल जाता है और खाँसी मिटती है.

सत्‍तू दो प्रकार के होते हैं एक है चने का सत्‍तू और दूसरा है जौ मिला सत्‍तू. दोनों को भून और पीसकर सत्तू बनाया जाता है. सत्तू शरबत को आप नमकीन या मीठा अपनी पसंद के हिसाब से बना सकते हैं.

सत्तू में मौजूद फाइबर गट की समस्‍या और कब्ज से निजात दिलाने में काफी मदद करता है. चना या जौ का बना सत्‍तू डायबिटीज में भी काफी फायदेमंद माना जाता है. आप इसमें चीनी की बजाय नमक मिलाकर इसे किसी भी समय सेवन कर सकते हैं. गर्मी के मौसम में सत्‍तू के सेवन से शरीर को ठंडा रखा जा सकता है.

उम्मीद करते है आपको हमारी यह पोस्ट Sattu Ka Business Kaise Kare और Sattu Ke Fayde Aur Nuksan पसंद आई होगी.

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